#रास्ते.....

हम सफर के हैं 
चल रहे हैं मुसलसल 
कहीं कम कहीं ज्यादा 
पर बढ़ रहे हैं मुसलसल 
ठहरते नहीं हैं कभी भी हम 
बस मंजिल का पता देते हैं बदल 

दूर............बहुत दूर हमें होता है जाना
संग हैं अपने ये आसमान और ये बादल 

हम दिखाते नहीं है दुनिया को 
पर देखते रहते हैं दुनिया सारी 
सुनिए हम हैं रास्ते.......आपके रास्ते 
हैं काम ही हमारा चल-चला चल-चल

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