वो याद आता है ऐसे !!
वो याद आता है ऐसे
हवा में सोंधी मिट्टी की खुशबू जैसे
मैं महसूस करती हूँ उसे
फिर महसूस करती जाती हूँ
वह कश्मीर की वादियों सा
रहता है चेहरे पर मेरे
मैं धूप की किरणों सी
सुनहरी होती जाती हूँ
वो यूँ होता है शामिल जिंदगी में मेरी
कि घुलता सा जाता है
वह मेरा होता जाता है
मैं उसकी हुयी जाती हूँ
मेरे सारे तसव्वुर इस इत्मीनान पर
आकर ठहर गये हैं
वह मुकम्मल है मुझ में और
मैं मुसलसल आगे बढ़ती जाती हूँ
देखूँ जो चेहरा उसका
तो ख़ुद का नजर आता है
यूँ एक ही जान मैं
दो जिस्म में जगह पाती हूं
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