सीने पर रख कर सर को उसके अपनी धड़कनें सुननी हैं.......
सीने पर रख कर सर को उसके
अपनी धड़कनें सुननी हैं
तुम पास आओ, पास रहो,
और पास हो जाओ मेरे
यह बात कहनी है
तुम ताकना तारों को और मैं तुम्हें
देखे चाँद ये नज़ारा और सोचे
किसकी ये चाँदनी है
मैं सुलझाऊँ बालों को उसके और
उलझ जायें अंगुलियां मेरी ही उसमें
लट ये उसकी ऐसी हैं
जैसे कान्हा की हैं
मैं हाथों को अपने रखूँ
पीछे से कांधे पर उसके
और चलूँ ऐसे चलती है
जैसे कोई रेल गाड़ी है
खेल खेले हम खेल खेल में ही
मैं बनूँ कभी बच्चा
और हो कभी वह ऐसे
जैसे कोई सहेली है
होना पूरा किसी का
किसी के होने से नहीं होता
तुम कह देना तुम मेरे हो और मैं तुम्हारी
बस यही बात सुननी है
सीने पर रख कर सर को
उसके अपनी धड़कनें सुननी हैं.......
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