प्रेम में डूबी स्त्री के पास प्रेम अपार होता है !!

प्रेम में डूबी स्त्री के पास 
प्रेम अपार होता है 
और संभावना होती है 
इसके और अधिक विस्तार की

मन, मस्तिष्क के साथ-साथ
वह करती है प्रेम 
अपनें शरीर के समस्त 
अंगों के माध्यम से भी

करती है वह सृजन 
मानव सृष्टि का 
पोषती है सृष्टि को
अपनें तन से

करती है वह जो
वह प्रेम का विस्तार है 
प्रेम सृजन द्वारा 
प्रेम पोषण द्वारा 
प्रेम स्पर्श द्वारा और आलिंगन से
प्रेम मिलन और विरह द्वारा भी

हैं अनन्त,असीमित,अनगिनत 
आयाम उसके प्रेम के
कोमल है प्रेम उसका
और कठोर भी

प्रेम उसका समागम में 
है प्रेम उसका आगम में 
अद्धभुत है अनुभूति 
उसके प्रेम की 

क्योंकि 
प्रेम में डूबी स्त्री के पास 
प्रेम अपार होता है  !!

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